Saturday, August 20, 2022

چاند ‏جب ‏ماہ ‏محرم ‏کا ‏نظر ‏آتا ‏ہے۔ ‏

ڈهول تاشے سے محرم کو،، منانے والے
غم سےشہداءکی بڑی دهوم مچانےوالے !

ढोल ताशे से मुहर्रम को मनाने वाले
   गम से शुहदा की बड़ी धूम मचाने वाले

تعزیہ اورسواری کےاٹهانےوالے
باگھ اور شیر کو،، نچانے والے !

ताज़िया और सवारी के उठाने वाले
बाघ और शेर को नचाने वाले

چاند جب ماہ محرم کا نظر آتا ہے
کیاتیرےجسم میں شیطان اترآتاہے ؟؟

चाँद जब माहे मुहर्रम का नज़र आता है
?? क्या तेरे जिस्म में शैतान उतर आता है

غم جنهیں ہوتاہےوہ ڈهول بجاتےہیں کہیں
دوسروں کی طرح،، تہوار مناتے ہیں کہیں ؟؟

गम जिन्हें होता हे वह ढोल बजाते हैं कहीं
?? दूसरो की तरह तहवार मनाते हैं कहीं

وہ خرافات کا بازار،، لگاتے ہیں،، کہیں
ڈهول باجےسےبهی میت کواٹهاتےہیں کہیں ؟؟

वो खुराफात का बाजार लगाते हैं कहीं
?? ढोल बाजे से भी मय्यत को उठाते हैं कहीं

کیا شریعت میں تمهارےاسےغم کہتےہیں
غم یہی ہے تو خوشی اور کسے کہتے ہیں ؟؟

क्या शरीअत में तुम्हारी इसे गम कहते हैं
?? गम यही हे तो ख़ुशी और किसे कहते हैं

تعزیہ داری کو تیمور نے ایجاد کیا
لایا ایران سے اور ہند میں آباد کیا ؟؟

ताज़िया दारी को तैमूर ने ईजाद किया
लाया ईरान से और हिन्द में आबाद किया

غم منانےکاعجب ڈهنگ یہ ایجادکیا
روح اسلام،، کو تیمور نے برباد کیا ؟؟

गम मनाने का अजब ढंग ये ईजाद किया 
?? रूह ए इस्लाम को तैमूर ने बर्बाद किया

فعل تیمور ہے،، یہ قول پیمبر،، تو نہیں
غم کا یہ رنگ شریعت کے برابر تو نہیں ؟؟

फाल तैमूर हे यह कौल ए पयम्बर तो नहीं
?? गम का यह रंग शरीअत के बराबर तो नही

خوب ہے ابن علی سے یہ محبت تیری
ساری دنیا سے نرالی ہے عقیدت تیری ؟؟

खूब हे इब्न ए अली से यह मुहब्बत तेरी
?? सारी दुन्या से निराली है अक़ीदत तेरी

تعزیہ،، اور سواری،، ہے عبادت،، تیری
عشق بازی کی محرم میں ہےعادت تیری ؟؟

ताज़िया और सवारी हे इबादत तेरी
?? इश्क़ बाज़ी की मुहर्रम में हे आदत तेरी

غم تجهے ہے،، تو ذرا اتنا ہی کر کے بتلا
ڈهول تاشے سے ذرا باپ کی میت کو اٹها ؟؟

गम तुझे है तो ज़रा इतना ही कर के बतला
?? ढोल ताशे से ज़रा बाप की मय्यत को उठा!

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